मृदा प्रदूषण क्या है इसे कम कैसे करे - Soil pollution

आज के इस आर्टिकल के माद्यम से मृदा प्रदूषण (Soil pollution) यानि भूमि प्रदुषण के बारे में जानने वाले है की मृदा प्रदूषण के कारण क्या है एवं भूमि प्रदुषण को कम करने के उपाय भी जानने वाले है

मृदा प्रदूषण


मृदा प्रदूषण - Soil pollution

समस्त पेड़ पौधे मृदा से ही आवश्यक मात्रा में जल एवं खनिज लवण प्राप्त करते हैं एवं अपने लिए भोजन पदार्थ का निर्माण भी भूमि सही करते हैं मिट्टी एक महत्वपूर्ण प्रतीक कारक है जो सही चट्टानों के रूपांतरण से उत्पन्न होती है

जानिए क्या है भूमि प्रदुषण 

आज जनसंख्या में दिन-प्रतिदिन अत्यंत वृद्धि होने के कारण बढ़ते शहरीकरण एवं अत्यधिक भवन निर्माण एवं गुरु के निर्माण के कारण कूड़ा कचरा एवं व्यर्थ पदार्थों में हानिकारक रासायनिक पदार्थ आदि विषाक्त तत्व डिस्क मिट्टी में जाकर मिल जाते हैं जिसके कारण से मिट्टी की उर्वरता में कमी आ जाती है

यानी कि हम कौन सकते हैं कि भूमि प्रदूषित हो चुकी है वनस्पति का विकास मूर्ति मिट्टी की उड़ता पर ही निर्भर करता है अतः पौधों की उचित वृद्धि में प्राकृतिक संतुलन बनाना अत्यंत आवश्यक है अन्यथा मृदा के प्रदूषित हो जाने से केवल वनस्पति ही नहीं उन पर आश्रित सभी जीव जंतु को भी नुकसान होने की संभावना बनी रहती है

मृदा प्रदूषण का अर्थ एवं परिभाषा

चट्टानों के टूटने एवं एवं रासायनिक क्रिया के द्वारा उनके अब चंद से मृदा का निर्माण होता है अनेक तत्व जैसे कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, तांबा, नाइट्रोजन, जस्ता एवं गंधक आदि लोग मिलकर मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं

मृदा में जब अनेक प्रकार के घातक पदार्थ जैसे कंजी साइड कीटनाशक जीभ नाशक पेस्टिसाइड एवं रासायनिक खाद आदि विषाक्त तत्व मिल जाते हैं तब यह तत्व मृदा में पाए जाने वाले लोगों में असंतुलन उत्पन्न कर देते हैं जिससे जिससे मृदा की उर्वरता में या तो कमी आती है या उर्वरता नष्ट हो जाती है और मृदा या भूमि प्रदूषित हो जाति है

मृदा प्रदूषण को निम्नलिखित परिभाषा द्वारा समझा जा सकता है

मृदा प्रदूषण किसे कहते हैं

जोग मृदा में रासायनिक एवं भौतिक तत्वों मिलकर मिट्टी का कृषि के दृष्टिकोण से अनुपयोगी बना देते हैं तब उसे मृदा प्रदूषण या मिट्टी का प्रदूषण कहा जाता है

जब मिट्टी में प्रदूषित जल कूड़ा कीटनाशक रासायनिक एवं रसायनिक मुक्त कीचड़ और और एक आदि अधिक मात्रा में प्रवेश कर जाते हैं तब मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आ जाती है इसे ही मृदा प्रदूषण कहते हैं

मृदा प्रदूषण के कारण

भूमि प्रदूषण के निम्नलिखित स्त्रोत एवं कारण है

1. औद्योगिक अपशिष्ट

उद्योगों से निकलने वाले व्यर्थ पदार्थ मृदा प्रदूषण के लिए उत्तरदाई होते हैं अनेक उद्योग इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ का निस्तारण नहीं हो पाता है और उन्हें इधर-उधर फेंक दिया जाता है या आसपास के नदी नालों या जल स्त्रोत में छोड़ दिया जाता है

अनेक उद्योगों जैसे कपड़ा उद्योग तेल परिष्करण संयंत्र उर्फ लोहा एवं पेस्टिसाइड कारखाने औषधि ग्लास एवं सीमेंट और पेट्रोलियम आदि उद्योगों द्वारा व्यर्थ पदार्थ निष्कासित किए जाते हैं अपशिष्ट पदार्थों से सल्फर डाइऑक्साइड, फ्लोराइट, नाइट्रिक ऑक्साइड एवं पारा तथा कैडियम आदि पाया जाता है जिससे मृदा की क्षारीयता बढ़ती है जिससे मिट्टी की उर्वरता में कमी आती है

2. शहरी एवं घरेलू अपशिष्ट

घरेलू एवं शहरी अपशिष्ट के अंतर्गत वाहित मल का सूखा कीचड़ कूड़ा करकट एवं ठोस पदार्थ जैसे डिब्बे चमड़े के टूटे-फूटे टुकड़े, कागज प्लास्टिक धातु के बर्तन इंधन के अवशेष खराब वाहन एवं अनुपयोगी पदार्थ आते हैं जो भूमि को प्रदूषित करते हैं

इसके अलावा मानव द्वारा अपने दैनिक जीवन में उपयोग में लाई जाने वाली वार्निश एवं पेंट आदि भी विश्व के रूप में शहरी अपशिष्ट के साथ मिलकर भूमि प्रदूषण की समस्या में वृद्धि करते हैं

प्रदूषित मृदा से जो पदार्थ देकर बाहर आते हैं उसमें विषैली गैसें अप गठित कार्बनिक पदार्थ भोजन के अवशेष विषैले हाइड्रोकार्बन एवं रोगजनक सूक्ष्म जीव होते हैं जो अनेक अनेक प्रकार के रोगों को जन्म देते हैं

3. कृषि कार्य

जैसा कि हम सभी जानते हैं अत्यधिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास ने कृषि क्षेत्रों को अत्यधिक प्रभावित किया है आज मानव फसलों के उत्पादन में अत्यधिक वृद्धि करने के उद्देश्य से अनेक रासायनिक उर्वरक को कीटनाशक दवाइयों आदि का अत्यधिक मात्रा में उपयोग करने लगा है

जिसको हानिकारक प्रभाव हमारी मृदा में देखने को मिल रहा है उसकी उरुतथा में धीरे-धीरे कमी आ रही है और ऐसी कई जगह पर भूमि बंजर भी हो गई है

4. कीटनाशक दवाइयों के कारण

आज के नए बाजारों में कीटनाशक दवाइयां कचरे के भाव में उपलब्ध होती है और इन्हीं कीटनाशकों की वजह से मिट्टी की गुणवत्ता में कमी आई है इन्हीं कीटनाशकों का उपयोग मनुष्य फसलों की रक्षा के लिए करता है परंतु मृदा उनकी अवशेषों को अवशोषित कर लेती है जिसके कारण से भूमि प्रदूषित हो जाती है

5. मृदा अवसाद

मृदा अवसाद के अंतर्गत मिट्टी एवं खनिज कौन आते हैं जो आती तेज हवा एवं बाढ़ के पानी के द्वारा खेती की भूमि से दूर चले जाते हैं अवसाद में कार्बनिक पदार्थों का स्तर मिट्टी की अपेक्षा अधिक हो जाता है

रेगिस्तान में चलने वाले तेज हवाओं के साथ रेत बड़ी मात्रा में उड़कर आसपास के क्षेत्र में उपजाऊ मिट्टी की सतह पर जम जाती है और उसे उत्पादन हेतु अयोग्य बना देती है

6. खनन के कारण

अत्यधिक मात्रा में खनन द्वारा भी मृदा प्रदूषण हो जाती है क्योंकि खनन में मनुष्य मिट्टी की ऊपरी सतह को हटा देता है जिससे पृथ्वी की गहराई में लवण रह जाते हैं यह भूमि की उर्वरता को स्थाई रूप से समाप्त कर देते हैं

खनन के कारण ही मृदा अपरदन अवसाद गाद का रिसाव होता है जिसकी पादप समूह एवं प्राणी समूह के क्षति के साथ जल प्रदूषण एवं मृदा प्रदूषण दीप फैलता है

खनन से अत्यधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है जिससे हरित ग्रह प्रभाव अम्लीय वर्षा यानी कि वायु प्रदूषण जैसी समस्या उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है

7. फार्म का अपशिष्ट

अनेक प्रकार के गायों पशुओं शुरू एवं मुर्गी फार्म की बढ़ती संख्या ने भी मिट्टी को प्रदूषित कर दिया है इन फार्मो को साफ किया जाता है जिससे इन कार्यों का अपशिष्ट पानी के साथ अगर मिट्टी में मिल जाता है और उसे प्रदूषित कर देता है यह मिट्टी में गाद के रूप में जमा हो जाता है एवं धीरे-धीरे रिस कर मिट्टी में चला जाता है

जानवरों की ब्याज पदार्थों में भी रोगों एवं विषाणु होते हैं जो पादप उपचयन में प्रवेश कर जाते हैं एवं मानव तथा प्राणियों के शरीर में पहुंचकर अनेक प्रकार की रोग उत्पन्न करते हैं

8. रेडियोधर्मी प्रदूषण

वर्तमान में परमाणु ऊर्जा प्राप्त करने एवं परमाणु अस्त्रों के निर्माण हेतु रेडियोधर्मी पदार्थों का उपयोग अत्यधिक बढ़ गया है रेडियोधर्मी पदार्थों की नाभि के उपकरणों के विस्फोट नाभि की धूल एवं रेडियोधर्मी याज पदार्थों की परिमाण स्वरुप उत्पन्न होते हैं जो मिट्टी में घुसकर मिट्टी को प्रदूषित कर देते हैं

मृदा प्रदूषण के परिणाम

मृदा की प्रदूषित होने से न केवल वनस्पति जगत प्रभात होता है बल्कि प्राणी जगत भी इससे काफी प्रभावित होता है इसमें कोई संदेह नहीं है कि आज मानव ने मृदा प्रदूषण को बढ़ाने में कमी नहीं छोड़ी है

1. मैदा का संरक्षण
2. कृषि क्षेत्रफल में कमी हो जाएगी
3. नाइट्रोजन स्थिरीकरण में कमी आएगी
4. मृदा अपरदन में वृद्धि होगी
5. लवणता में वृद्धि होगी
6. प्रदूषित गैसों का उत्सर्जन बढ़ेगा
7. टंकी झीलों तथा पोखरो का निक्षेपण होगा
8. जैव विविधता में कमी आएगी
9. नालियों का बंद होना

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मृदा प्रदूषण का उपचार

मनुष्य प्राणी एवं संपूर्ण जीव जगत का अस्तित्व मृदा पर ही आधारित हैं मिट्टी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं

  1. शहरी ऑफसेट कूड़ा करकट वाहित मल जल आदि का नियमित रूप से निस्तारण होना अति आवश्यक है इसी कार्य हेतु नगर निगम एवं नगर पालिका को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए
  2. कीटनाशकों का शाकनाशी एवं रासायनिक रासायनिक उर्वरकों का एवं खाद के उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए एवं जितना हो सके उतना कम ही इनका प्रयोग करना चाहिए
  3. औद्योगिक अपशिष्ट का भली-भांति निस्तारण आवश्यक है इस हेतु यह ध्यान रखना चाहिए कि इन उद्योग इकाइयों द्वारा पर्यावरणीय मापदंडों का कठोरता से पालन हो
  4. मृदा प्रदूषण को रोकने हेतु आवश्यक की मृदा संरक्षण मादा का कटाव को रोका जाए इस हेतु सड़क नदी तालाबों एवं रेल मार्गों के दोनों और वृक्षारोपण किया जाए इससे ना केवल धूल पर रोक लगेगी जल प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण भी कम होगा
  5. शहरों एवं गांव में जो कूड़ा करकट होता है उसे यदि एकत्रित करके रखा जाए तो वहां सड़क पर प्रदूषण उत्पन्न नहीं करेगा जलाने लायक कूड़े को जला दिया जाना चाहिए
  6. धातु के टुकड़े कांच एवं प्लास्टिक और पॉलिथीन आदि के निस्तारण का उचित प्रबंधन किया जाना चाहिए
  7. गोबर की खाद तथा हरी खाद का प्रयोग कृषि में करने के लिए लोगों को प्रेरित करना चाहिए
  8. लोगों में अधिक से अधिक यह जागरूकता लानी चाहिए कि पेड़ पौधों को लगाना आवश्यक है
आज हमने इस post के माध्यम से मृदा प्रदूषण क्या है और मृदा प्रदूषण किस कारणों से होता है और इसे कम करने के उपाय क्या है इसके बारे में जाना है

आपके द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्न

मृदा प्रदूषण पर निबंध कैसे लिखे
जैसे की आपने हमसे पुचा की मृदा प्रदूषण पर निबंध कैसे लिखे तो आप इसे आसन तरीके से हमने जिस तरह से बताया उससे आप अपने सब्दो में मृदा प्रदूषण पर निबंध को लिख सकते है

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